बहुत सुग्घर तरीका ले गहिर गोठ वाले कवित्त गाये हे मयंक वर्मा ह। दान के दर्शन कुछ लाइन म अपन पूरा विस्तार के संग आये हे। मथुरा प्रसाद वर्मा भाई तोर लेखनी ल सलाम। गरब मांगें ले मिट जाथे चलो मांगें बर संगी हो… छेरछेरा के बहुत बढि़या कविता.
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